आल्हा-उदल : चार सौ साल पहले हुई थी मौत, आज भी अपने बनाये मंदिर में पूजा करने आती है आत्मा

17 Dec 2017 03:31 48
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आल्हा उदल दो ऐसे भाई थे जिनकी वफादारी और बहादुरी के चर्चे आज भी लोक गीतों के माध्यम से महोबा निवासी कहते है. यही नहीं यूरोपीय महायुद्ध में सैनिकों को रणमत्त करने के लिये ब्रिटिश गवर्नमेण्ट को भी इस (आल्हखण्ड) का सहारा लेना पड़ा था।" राजपूतों के नैतिक नियमों में केवल वीरता ही नहीं थी बल्कि अपने स्वामी और अपने राजा के लिए जान देने की भावना रखने वाले दोनों भाइयों को ऐसी कीर्ति मिली की लोग आज भी मिसाले देते है.

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